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2300 कोरोना मरीजों को 101 जिले में सेवा दे चुकी हैं गोरखपुर की एम्बुलेंस

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  • 2300 कोविड मरीजों को सेवा दे चुकी है टीम 101

  • सुरक्षात्मक उपाय अपनाते हुए खुद को कोरोना से बचा कर रखा है

  • 108 की 21, जबकि 4 एएलएस एंबुलेंस 24 घंटे कोरोना के लिए समर्पित हैं

  • सेवा के जिला प्रबन्धक के जरिये कंट्रोल रूम से मिली सूचनाओं पर मरीजों को मिलती है सेवा

गोरखपुर, 31 अगस्त 2020 I 108 नंबर एंबुलेंस सेवा की टीम 101 जिले में अब तक 2300 कोविड उपचाराधीन मरीजों को सेवा दे चुकी है। इस समय 108 नंबर की 21 एंबुलेंस, जबकि 4 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस 24 घंटे कोरोना उपचाराधीन मरीजों के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही हैं। इन एंबुलेंस से जुड़े सभी कर्मचारी सुरक्षात्मक उपाय अपनाते हुए खुद को कोरोना से बचा कर रखे हुए हैं। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी आरसीएच डॉ. नंद कुमार ने बताया कि इस सेवा के जिला प्रबंधक अजय उपाध्याय समेत कुल 101 लोगों की टीम कंट्रोल रूम से मिली सूचनाओं के आधार पर मरीजों को सेवा प्रदान कर रही हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी के दिशा-निर्देश में निरंतर इस सेवा की समीक्षा भी की जाती है। सेवा का संचालन कर रही जीवीके फाउंडेशन के प्रतिनिधि के तौर पर जिला प्रबंधक को भी 24 घंटे मोबाइल पर अलर्ट रहने का निर्देश है और वह एवं उनकी टीम समर्पित भाव से काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि सभी 25 एंबुलेंस पर 12-12 घंटे की शिफ्ट में दो-दो (एक पॉयलट और दूसरा ईएमटी) लोगों की ड्यूटी रहती है। कंट्रोल रूम से जिला प्रबंधक को मरीज के बारे में जानकारी दी जाती है और बताया जाता है कि उसे कहां शिफ्ट करना है। इसके बाद सुरक्षात्मक उपायों को अपनाते हुए जिले के अंदर मरीज शिफ्ट करने के लिए 108 एंबुलेंस की गाड़ी जबकि बाहर मरीज ले जाने के लिए या फिर गंभीर मरीजों के लिए एएलएस सेवा की एंबुलेंस मौके पर पहुंचती है। मरीज को आवश्यकतानुसार वेंटीलेटर या फिर ऑक्सीजन की सुविधा देते हुए संबंधित फैसिलिटी तक पहुंचाया जाता है। इस काम में रिस्पांस टाइम का विशेष तौर पर ध्यान रखा जाता है।

जिला प्रबंधक अजय उपाध्याय ने बताया कि एंबुलेंस में सैनिटाइजेशन का इंतजाम किया गया है। कोविड मरीज को पहुंचाने के बाद गाड़ी सैनिटाइज की जाती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीपीई किट, मॉस्क, ग्लब्स, सैनिटाइजर समेत सभी सुरक्षात्मक उपकरण दिये गये हैं। होम आइसोलेशन की व्यवस्था लागू होने से पहले एक-एक दिन में औसतन 50-60 मरीज तक पहुंचाने पड़ते थे लेकिन अभी दबाव थोड़ा कम हुआ है। इस समय औसतन 20-30 मरीजों को पहुंचाने की आवश्यकता पड़ रही है।

भेदभाव से कष्ट होता है

ईमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन (इएमटी) रमाकांत तिवारी का कहना है कि कोविड मरीजों को पहुंचाने में पूरी सतर्कता रखी जाती है और समय-समय पर खुद की कोरोना जांच भी कराई जा रही है। मरीज को छोड़ने के बाद गाड़ी सैनिटाइज करने के अलावा पीपीई किट को निर्धारित स्थान पर डिस्पोज करने के बाद खुद स्नान किया जाता है। इसके बावजूद गांव जाने पर जब किसी को पता चलता है कि कोविड एंबुलेंस पर सेवा दे रहे हैं तो वह दूरी बना लेता है। फिर भी इस बात का संतोष है कि टीम के प्रयासों से काफी लोगों की जान बची है। रमाकांत ने बताया, ‘‘ हमारा काम संवेदनशील है और छोटी सी चूक भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है।’’ एक अन्य ईएमटी राजकुमार का कहना है कि क्षेत्र में पीपीई किट पहन कर मरीज ले आने जाने पर लोग भागना शुरू कर देते हैं। यह भेदभाव ठीक नहीं है। दो गज दूरी और मॉस्क का इस्तेमाल काफी है। किसी स्वास्थ्यकर्मी को देख कर इस प्रकार की प्रतिक्रिया उचित नहीं है। वह कहते हैं, ‘‘यह समय न तो डरने का है और न ही लापरवाह रहने का है। उचित सावधानी बरत कर और हाथों की साफ-सफाई से बीमारी का मुकाबला करना होगा।’’

समय से मिली एंबुलेंस सेवा

मोहद्दीपुर निवासी राजबीर सिंह का कहना है कि जब उनका परिवार कोविड से जूझ रहा था तो अगर सबसे अच्छी सुविधा मिली तो वह एंबुलेंस की ही थी। कई ऐसे मौके आए जब उन्होंने जिला प्रबंधक अजय उपाध्याय को खुद फोन किया और महज 5 मिनट के भीतर एंबुलेंस की सुविधा मिल गयी। कोरोना के कारण राजबीर की प्रिय बहन इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उपचार के दौरान एंबुलेंस ने जिस प्रकार उनकी मदद की वह उसे कभी नहीं भुलाएंगे। एक अन्य कोरोना उपचाराधीन महिला के परिजन रामनिवास का कहना है कि 27 अगस्त की सुबह उनकी भाभी को क्रिटिकल हालत में ईएमटी रमाकांत और पॉयलट पुली ने टीबी अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कालेज शिफ्ट किया। इस दौरान एंबुलेंस में सभी सुविधाएं मिलीं और वह सेवा से संतुष्ट हैं।

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