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“जीवन है अनमोल इसको न समझें कोई खेल’’

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (10 सितम्बर) पर विशेष

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  • हताशा व निराशा में कोई भी गलत कदम न उठायें

  • अपनों से करें बात, हर समस्या का होगा समाधान

जीवन में जल्द से जल्द सब कुछ हासिल कर लेने की तमन्ना और एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में आज लोग बेवजह मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं । इसमें जरा सी नाकामयाबी अखरने लगती है और लोग अपनी जिन्दगी तक को दांव पर लगा देते हैं । कोरोना काल में भी लाक डाउन के चलते तमाम लोगों की नौकरियां चलीं गयीं, लोगों को अपनी रोजी-रोजगार छोड़कर वापस गाँव लौटना पड़ा । लोग शुरू में इसे लेकर तनाव में थे लेकिन अपनों के बीच बैठकर जब समस्या रखी तो उसका कोई न कोई रास्ता जरूर निकला । इसलिए जब भी हताशा-निराशा में कोई भी गलत कदम उठाने की बात दिमाग में आये तो सबसे पहले अपनों के करीब जाएँ । इन्हीं मामलों को देखते हुए हर साल 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है । इसे मनाने का मकसद आत्महत्या को रोकने के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना । इसके जरिये यह सन्देश देने की कोशिश की जाती है कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है इस वर्ष वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे (विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस) की थीम है- “आत्महत्या रोकने को मिलकर काम करना ”

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 9336929266 हेल्पलाइन नंबर जिले में सुबह 10.00 बजे से शाम 7.00 बजे तक क्रियाशील रहता है। अगर किसी को भी मानसिक अवसाद है या फिर आत्महत्या का ख्याल आ रहा है तो उसे इस नंबर पर परामर्श लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण के दौरान करीब आधा दर्जन ऐसे लोगों की हेल्पलाइन नंबर से मदद की गई जिनके मन में जीने की इच्छा खत्म हो रही थी।

हेल्पलाइन नंबर पर सेवा प्रदान कर रहे नैदानिक मनोवैज्ञानिक रमेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि कोविड कॉल में लोगों में मानसिक अवसाद की समस्या बढ़ी है। हेल्पलाइन नंबर पर छात्रों और कुछ आर्थिक पर परेशान लोगों के फोन आए जो काफी निराश थे और जीने की ख्वाहिश छोड़ने लगे थे। ऐसे लोगों को परामर्श दिया गया। फोन पर घंटों काउंसिलिंग की गई और वह मजबूत इरादों के साथ सामाजिक योगदान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि मानसिक समस्याओं के निवारण के लिए नोडल अधिकारी डॉ. नंद कुमार की देखरेख में मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही और एक पूरी टीम योगदान दे रही है। अगर किसी के मन में बुरे ख्याल आ रहे हैं तो एक बार हेल्पलाइन नंबर पर अवश्य बात करें। यहां हर समस्या का मनोवैज्ञानिक समाधान होगा।

वैश्विक आंकड़ें

इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन के अनुसार विश्व में आठ लाख लोग हर साल आत्महत्या करते हैं , यानि हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति की मृत्यु आत्महत्या से होती है।

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की दर 2.4 प्रति लाख जनसंख्या है मतलब यह है कि एक लाख की आबादी पर लगभग दो लोग आत्महत्या करते हैं वहीं राष्ट्रीय दर 10.4 प्रति लाख जनसंख्या है।

उचित परामर्श आवश्यक

सूबे के मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डा. सुनील पाण्डेय ने बताया, यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से हीन भावना से ग्रस्त है अथवा आत्महत्या करने की सोच रहा है तो वह एक मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। मानसिक अस्वस्थता के कारण ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो सकती है , उचित परामर्श और चिकित्सा पद्धति के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है।

समस्या है तो समाधान भी है।

डा. पाण्डेय का कहना है – जब व्यक्ति अवसादग्रस्त या तनाव में होता हैं तो वह चीजों को वर्तमान क्षण के परिप्रेक्ष्य में देखता है । एक सप्ताह अथवा एक माह के बाद यही चीजें भिन्न रूप में दिखाई देने लगती हैं। जो आत्महत्या करने के बारे में सोचते है, वह मरना नहीं चाहते बल्कि केवल अपनी पीड़ा को मारना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें अकेले उस स्थिति का सामना करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र अथवा किसी सहयोगी से बात भर कर लेने पर उसका समाधान मिल सकता है।

क्या करें यदि मन में ऐसे विचार आते हों?

नोडल अधिकारी के अनुसार- जीवनशैली में बदलाव लाएं, ख़ुद पर ध्यान देना शुरू करें, खानपान को संतुलित करें, नियमित रूप से कुछ समय व्यायाम या योग करते हुए बिताएं। नकारात्मक सोच को बाहर का रास्ता दिखाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात अकेले न रहें, परिवार और दोस्तों के संग रहें, सकारात्मक होकर कार्य करे। याद रखें, हर एक ज़िंदगी महत्वपूर्ण है इसे भरपूर जियें और तनाव से दूर रहें ।

भारत सरकार का भी है हेल्पलाइन नंबर

सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नम्बर 1075 पर पर भी इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं | निमहंस (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस) के टोल फ्री नम्बर – 080-46110007 पर कॉल कर परामर्श ले सकते हैं | इसके अलावा 7 सितम्बर को मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित समस्याओं के समाधान हेतु परामर्श के लिए सरकार ने किरन हेल्पलाइन न. – 1800-500-0019 जारी किया है |

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