उत्तर प्रदेशएजुकेशनकल्चरल & इवेंटगोरखपुरगोरखपुर मंडलशिक्षा

जनसंख्या में होती रही वृद्धि 2031 तक भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में होगा पहले नंबर पर

hjkk

 

महाराणा प्रताप पी.जी. कालेज, जंगल धूसड़, गोरखपुर में बी.एड्. विभाग के तत्वावधान में ‘‘जनसंख्या वृद्धि और जीवन की गुणवत्ता में सम्बन्ध’’ विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। व्याख्यान कार्यक्रम का शुभारम्भ महाविद्यालय के बी.एड्. विभाग के प्राध्यापक श्री नवनीत कुमार सिंह के स्वागत उद्बोधन से प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात विशिष्ट व्याख्यान की मुख्य वक्ता डॉ. रीता सिंह (एसोसिएट प्रोफेसर, डिपार्टमेन्ट ऑफ टीचर एजूकेशन, टी.डी. पी.जी. कालेज, जौनपुर) ने अपने विचार व्यक्त करते हुए व्याख्यान के मूल विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कीं।

व्याख्यान के मूल विषय जनसंख्या शिक्षा और जीवन की गुणवत्ता को दो अलग-अलग रूपों में विभाजित कर अपनी बात प्रस्तुत करते हुए कहा कि जनसंख्या शिक्षा का सामान्य अर्थ किसी विशेष क्षेत्र में रहने वाले लोगो के समूह से है। भारत के सन्दर्भ में वस्तुतः जनसंख्या शिक्षा मानव संसाधन विकास की प्रक्रिया है तथा जनसंख्या वृद्धि एवं जीवन की गुणवत्ता में संगतता देखने को नहीं मिलती है। विश्व की 75 प्रतिशत आबादी मात्र 5 प्रतिशत भूमि पर निवास करती है। भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर है। ऐसा अनुमान है कि यदि जनसंख्या में वृद्धि इसी तरह होती रही तो 2031 तक भारत जनसंख्या के मामले में विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त कर लेगा।

जनसंख्या वृद्धि में अशिक्षा, निर्धनता एवं प्रवास महत्त्वपूर्ण कारक है। माल्थस का मत है कि जनसंख्या में वृद्धि गुणात्मक होती है जबकि खाद्यान्न उत्पादन इसी दर से नही बढ़ता है। जनांकिकी सिद्धान्त में जनसंख्या वृद्धि के पाँच चरण बताये गये हैं। जनसंख्या वृद्धि में धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक कारकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। आज चिकित्सा क्षेत्र में सुधार होने के कारण मृत्यु दर पर नियन्त्रण हुआ है जिसका प्रतिफल है कि जनसंख्या वृद्धि में निरन्तरता देखने को मिल रही है। जनसंख्या वृद्धि पर्यावरण असन्तुलन का महत्त्वपूर्ण कारक है। जनसंख्या वृद्धि के कारण जनसंख्या विस्फोट, हरित गैस का प्रभाव एवं कृषि योग भूमि में निरन्तर कमी हो रही है। चिकित्सा के मामले में भारत 145वें स्थान पर है।

भारत में दस लाख की आबादी पर मात्र तीन मनोचिकित्सक है। मानसिक स्वास्थ्य कानून 2017 के धारा 21 में मनोवैज्ञानिक समस्याओं को भी बीमा पालिशी के दायरे में लाया गया है। आज हम जनसंख्या नियन्त्रण की स्थिति की आरे बढ रहे हैं। सन् 2020 में भारत में जनसंख्या वृद्धि 0.9 प्रतिशत है। भारत सरकार द्वारा जनसंख्या नियन्त्रण के सम्बन्ध में अनेक कानून बनाये गये हैं। छोटा परिवार सुखी परिवार जैसे जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, लेकिन जनसंख्या वृद्धि पर प्रभावी नियन्त्रण नहीं हो पा रहा है। कानून की वजाय लोगों की मनोवृत्ति में संशोधन कर, साक्षरता जागरूकता अभियान के द्वारा ही प्रभावी नियन्त्रण किया जा सकता है। जनसंख्या वृद्धि एवं जीवन की गुणवत्ता में एक सहसम्बन्ध है। ‘ह्यूमन डेवलेप्टमेंट इन्डैक्स’ में भारत 129 वें स्थान पर है। जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए भौतिक तत्वों के साथ-साथ अभौतिक तत्वों जैसे सावेंगिक एवं आध्यात्मिक प्रज्ञा तथा स्वस्थ्य सकारात्मक अभिवृत्ति के द्वारा ही जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है एवं एक अच्छा उत्पादक नागरिक का निर्माण कर सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
English English Hindi Hindi
Close