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‘‘सुरक्षित हैं सरकारी टीके, ई-विन एप से होती हैं मॉनीटरिंग’’

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  • टीकों की निगरानी के लिए जिले के 88 कोल्ड चेन हैंडलर्स और उनके सहयोगी प्रशिक्षित किये गये

  • नवम्बर से जनवरी तक चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान, सोमवार को भी आयोजित होंगे सत्र

  • डब्ल्यूएचओ, यूनीसेफ और यूएनडीपी संस्थाएं टीकाकरण कार्यक्रम में दे रही हैं तकनीकी सहयोग

गोरखपुर, 23 अक्टूबर 2020 I सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध टीकों (वैक्सीन) की विश्वसनीयता बनाए रखने में कोल्ड चेन मैनेजमेंट की अहम भूमिका रही है। यह टीके आईस लाइन रेफ्रिजरेटर (आईएलआर) में सुरक्षित रखे जाते हैं और ई-विन एप के जरिये इनकी मॉनीटरिंग की जाती है। इस व्यवस्था को बनाए रखने में कोल्ड चेन हैंडलर्स की अहम भूमिका है। यह जानकारी जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल ने दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिले के 88 कोल्ड चेन हैंडलर्स को जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज कुमार पांडेय की मौजूदगी और उनकी अध्यक्षता में प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि नवम्बर से जनवरी माह तक विशेष टीकाकरण अभियान चलना है जिसके कारण इस प्रशिक्षण की महत्ता और भी बढ़ जाती है। डब्ल्यूएचओ, यूनीसेफ और यूएनडीपी संस्थाएं टीकाकरण कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग दे रही हैं।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी ने बताया कि विशेष अभियान में सोमवार को अतिरिक्त टीकाकरण सत्र चलेगा। फिलहाल प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य उन बच्चों को टीकाकरण का लाभ दिलवाना है जो कोविड काल में इस सेवा से वंचित रह गये या फिर जो प्रवासी हैं और जिनका टीकाकरण नहीं हो पाया है।

प्रशिक्षु कोल्ड चेन हैंडलर शैलेष साहनी ने बताया कि टीके का तापमान दो से आठ डिग्री के बीच ही रहना चाहिए। पॉवर कट और जेनरेटर की समस्या होने पर कोल्ड बॉक्स में टीके सुरक्षित तरीके से रखने के बारे में जानकारी दी गयी। प्रशिक्षु अशोक ने बताया कि यह सिखाया गया कि टीकों के कोल्ड चेन से जुड़ी जानकारी ई-विन एप में नियमित तौर पर फीड की जानी चाहिए।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी केएन बरनवाल, यूएनडीपी के प्रोग्राम ऑफिसर राजीव रंजन, जिला समन्वयक पवन, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एसएमओ डॉ. संदीप पाटिल, यूनीसेफ से जुड़े मनोज श्रीवास्तव और गवासुद्दीन ने कोल्ड चेन हैंडलर्स को प्रशिक्षित किया। प्रशिक्षण में टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े मंडलीय अधिकारी डीपी सिंह, जिला स्तरीय अधिकारी दिलीप श्रीवास्तव और राजेश विश्वकर्मा ने भी अपने तकनीकी अनुभवों को साझा किया।

पांच साल में सात बार, छूटे न टीका एक बार-सीएमओ

मुख्य चिकित्साधिकारी ने ‘’पांच साल में सात बार, छूटे न टीका एक बार’’ अपील करते हुए कहा है कि गर्भवती महिलाओं के लिए टीडी 1, टीडी 2 व टीडी बूस्टर, बच्चे के जन्म के समय ओपीवी 0, हेपेटाइटिस बी बर्थ डोज, बीसीजी, जन्म के छह सप्ताह के भीतर ओपीवी 1, रोटा 1, एफआईपीवी 1, पेंटावैलेंट1 व पीसीवी 1, 10 सप्ताह के भीतर ओपीवी 2, रोटा 2, पेंटावैलेंट 2, 14 सप्ताह के भीतर ओपीवी 3, रोटा 3, एफआईपीवी 2, पेंटावैलेंट 3, पीसीवी 2, 9 से 12 महीने के बीच एमआर1, जेई 1, पीसीवी बी, 16 से 24 महीने के बीच ओपीवी बी, डीपीटी बी 1, एमआर 2, जेई टू, 5 से 6 साल के बीच डीपीटी बी 2, 10 साल की उम्र पर टीडी और 16 साल की उम्र पर लगने वाला टीडी टीका स्वास्थ्य विभाग निशुल्क उपलब्ध कराता है। इसी साल इसमें निमोनिया का पीसीवी का टीका भी शामिल कर लिया गया है।

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