उत्तर प्रदेशगोरखपुरगोरखपुर मंडलस्वास्थ्यहेल्थहेल्थ टिप्स

दवा विक्रेता समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से किया मुलाकात

po
1
Vishnushankarjwelers
vishnu
download_20200919_124217

पिछले दिनों हुई जांच के संदर्भ में दवा विक्रेताओं में आक्रोश था. फार्मासिस्ट की अनुपलब्धता पूरे उत्तर प्रदेश सहित अन्य कई प्रदेशों में है ! प्रादेशिक संस्था ओसीडी यूपी के प्रदेश अध्यक्ष श्री दिवाकर सिंह जी व प्रदेश महामंत्री श्री सुधीर अग्रवाल जी से चर्चा के पश्चात दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष योगेंद्र नाथ दूबे व महामंत्री आलोक चौरसिया की अगुवाई में दवा विक्रेता समिति का एक प्रतिनिधि मंडल आज माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात कर फार्मासिस्ट के अभाव में दवा दुकानदारों के ऊपर प्रशासनिक कार्यवाही के संदर्भ में माननीय मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बातें रखीं।

दवा विक्रेता समिति के अध्यक्ष योगेंद्र नाथ दूबे एवं महामंत्री आलोक चौरसिया ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख से ऊपर रजिस्टर्ड दवा की दुकानों पर ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने के बाद आई व्यावहारिक दिक्कत के संबंध में कुछ बातें आप को अवगत कराना चाहूंगा जो निम्नलिखित है – उत्तर प्रदेश फार्मेसी काउंसिल में रजिस्टर्ड फार्मासिस्टोंं की संख्या से कई गुना दवा की दुकानें प्रदेश में है आज के आंकड़ों के हिसाब से कुल लगभग पौने दो लाख के आसपास फार्मासिस्ट ही फार्मेसी काउंसिल में रजिस्टर्ड है । (जबसे फार्मेसी काउंसिल है, यानी कि 1956 के आंकड़ों के हिसाब से लगभग 30% लोग या तो अब तक जीवित नहीं रहे या रिटायर हो चुके हैं 20% फार्मासिस्ट अन्य प्रदेशों में केमिकल दवाओं के फैक्ट्री में कार्यरत हैं 10% लोगों ने फार्मेसी की पढ़ाई की तो पर आज मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव या किसी अन्य व्यवसाय में कार्यरत हैं 30% फार्मासिस्ट प्रदेश के विभिन्न नर्सिंग होम/ मेडिकल कॉलेज, ऐम्स, पी0एच0सी0, सी0एस0सी0 इत्यादि जगहों पर कार्यरत है यानी कुल 10% ही फार्मासिस्ट दवा की दुकान पर कार्य करने हेतु मौजूद हैं जबकि ड्रग एक्ट 1940 – 1945 के हिसाब से मेडिसिन शुड बी परचेज एंड सोल्ड अंडर सुपरविजन आफ ए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ओनली। ऐसी स्थिति में प्रदेश की 90% दुकानें बंद हो जाएंगी और लाखों बेरोजगार हो जाएंगे रही बात फार्मासिस्ट की तो आज जो गिनती में है उनसे दवा विक्रेता लगातार प्रताड़ित हो रहा है क्योंकि साल भर के पैसे का काम करने की वह एकमुश्त पैसा लेते हैं लेकिन चार-पांच महीने बाद ही ब्लैकमेल कर और पैसे की डिमांड करते हैं जिससे दुकानदारों को विभाग के चक्कर लगाने पड़ते हैं और पैसे के बदले सिर्फ डिग्री ही ऑनलाइन फिड कर आते हैं, ड्यूटी भी नहीं देते हैं कुल मिलाकर फार्मासिस्ट के इस व्यापार से दवा व्यापारी चौतरफा शोषित होता है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने सार्थक आश्वासन देते हुए कहा कि दवा विक्रेताओं का किसी भी तरीके से उत्पीड़न और शोषण नहीं होगा

Related Articles

Back to top button
English English Hindi Hindi
Close