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शिशुओं को एसएनसीयू तक लाने के लिए 102 नंबर की निःशुल्क सेवा अनिवार्य

2020-12-07
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  • मिशन निदेशक ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजा है पत्र

  • शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एंबुलेंस सेवा पर जोर

  • गर्भवती और शिशुओं के प्रति समर्पित है 102 नंबर सेवा

गोरखपुर, 16 दिसम्बर 2020 I एक वर्ष तक की आयु के शिशुओं को जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कालेज के सिक्ड न्यू बार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) तक लाने की सुविधा 102 नंबर एंबुलेंस सेवा के तहत निःशुल्क उपलब्ध है। इस संबंध में मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेज कर इस सुविधा को सुनिश्चित करवाने को कहा है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए एंबुलेंस सेवा पर जोर दिया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने पत्र की पुष्टि करते हुए बताया कि 102 नंबर एंबुलेंस सेवा गर्भवती और शिशुओं के स्वास्थ्य के प्रति ही समर्पित है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में 102 नंबर सेवा की 50 एंबुलेंस हैं। यह एंबुलेंस गर्भवती को एएनसी जांच, प्रसव के लिए अस्पताल लाने, नसबंदी के बाद घर छोड़ने और प्रसव के बाद घर छोड़ने की सेवा देती हैं। मिशन निदेशक के पत्र के अनुसार नवजात और शिशुओं के बीमार होने की दशा में भी आशा और एएनएम के द्वारा संदर्भित किये जाने पर एसएनसीयू तक निःशुल्क सेवा उपलब्ध कराना है। यह प्रावधान पहले से ही है। इसके शत प्रतिशत अनुपालन के संबंध में नोडल अधिकारी डॉ. नंद कुमार और एंबुलेंस सेवा के जिला समन्वयक अजय उपाध्याय को पुनः दिशा-निर्देशित कर दिया गया है।

इन्हें रखते हैं एसएनसीयू में

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि 34 सप्ताह से पहले पैदा, 1800 ग्राम से कम वजन, 4 किलो वाले या 40 सप्ताह में पैदा बच्चों के लिए एसएनसीयू की सुविधा अनिवार्य है। इसके अलावा पेरीनेंटल एफीक्सिया, न्यूओनेटल जुआंडिस, रेस्प्रेटरी डिस्ट्रेस, रेफ्यूजल टू फीड, सेंट्रल क्यूनोसिस, एप्निया या गैस्पिंग, न्यूओनेटल कंवल्सन, बेबी ऑफ डायबिटिक मदर, डायरिया समेत 24 स्थितियों में नवजात को यहां रख कर इलाज देते हैं। आवश्यकता पड़ने पर एक वर्ष से कम उम्र तक के शिशुओं को भी यहां भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है।

एसएनसीयू को जानिये

एसएनसीयू नवजातों को समर्पित यूनिट होती है। जन्म लेने से 28 दिन तक बच्चे को नवजात माना जाता है। जन्म के तुरंत बाद अगर बच्चे में कोई भी स्वास्थ्य संबंधित दिक्कत है तो उसे भर्ती कर लिया जाता है। नवजात तब तक चिकित्सक व स्टॉफ की देखभाल में रहता है जब तक कि वह स्वस्थ न हो जाए। जिला महिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इसकी सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।

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